उत्तराखंड के गानों और कहानियों में 'घुघुती' का नाम आपने सुना ही होगा। यहां की प्रकृति में घुघुती निवास करती है। चैत के महीने में खूब सारी घुघुति देखने मिलती हैं। इससे सम्बंधित एक प्रसिद्ध कहानी है: एक समय की बात है। एक गांव में ढोल बज रहे थे। शादी का माहौल था। चैतू की मां कहती है, "ऊपर देखकर आ, तेरी बहन घुघुति तैयार हुई कि नहीं!" मां का आदेश मानकर वह अपनी दीदी को देखने गया। घुघुती सुंदर सी पीली साड़ी पहन कर बैठी थी। हल्दी के कारण उसके हाथ चमक रहे थे। उसके बगल में उसकी सहेलिया