यह कविता महक द्वारा नेचर साइंस इनिशिएटिव की तीन दिवसीय कार्यशाला में बिताए गए समय और उससे जुड़े अनुभवों की अभिव्यक्ति है। कार्यशाला के दौरान प्रकृति और उसके छोटे-छोटे जीवों के बारे में मिली नई सीख ने उनकी सोच को बदल दिया। यह कविता उसी बदलाव, जिज्ञासा और प्रकृति के प्रति बढ़े लगाव को दर्शाती है। महक जी.आई.सी. ढिकुली में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं। उन्हें प्रकृति, वन्यजीवों तथा फोटोग्राफी में विशेष रुचि है।यह कविता महक द्वारा नेचर साइंस इनिशिएटिव की तीन दिवसीय कार्यशाला में बिता